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भेड़चाल

 वो बुझता जलता उत्साह सा उजाला, था ठहरता भागता यूँ सफर वो हमारा अब बदल गया ... मौसम लगता है, अब सँवर गया है हर शख्स बेचारा देखे है मुड़ के हर कोई हमें अब, खुश रहकर रुकना कहलाता आवारा अब चलना होगा किसी भेड़ चाल में, इस कुँए में गिरना होगा दोबारा ।